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"एक जंग"चीर हरण कि लम्बी होती कहानी

Posted On: 30 Jan, 2014 social issues में

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निर्भया कांड के लिए निर्भया ही जिम्मेदार, रात में फिल्म देखने गई ही क्यूं थी: आशा

Nirbhaya is responsible for her gangrape says NCW member Asha Mirje दिल्ली में हुए निर्भया कांड और मुंबई के शक्ति मिल गैंग रेप के लिए महिला आयोग की सदस्या ने पीड़िताओं को ही ठहरा दिया जिम्मेदार. पड़िये पड़िये बड़ी मजेदार और रोचक खबर है .कहना ये है कि ” रात में फिल्म देखने गई ही क्यूं थी”……………….कितना गैर जिम्मेदाराना बयान है उन महिलाओ का जो महिला आयोग कि सदस्य है यही बात बड़े पुरजोर तरीके से साबित करती है कि ये उस आयोग के लिए कितने अयोग्य है ……और सच में इन बयान को जारी करने वाली उन महान महिला आत्मा को मैं ” दाद” भी देना चाहूंगी कि ये “वहशी औरतो को ” भगवान से तनिक भी डर नहीं लगा ऐसा कहते हुए…आप विचार कर सकते है कि राह चलते अगर आपकी बेटी बहन पत्नी मित्र किसी दुर्भाग्य वश रात में कार्य करने को मजबूर हो जाये तो “पक्का महिला आयोग मत जाइयेगा”……………….यहाँ तो भगवान ने ऐसी परिस्तिथि दी है कि ये मुह खोल कर बोल सकती है …पर तब क्या बोलती यदि इस अँधेरी रात में किसी बेटी के पिताजी को दिल का दौरा पड़ता और वो उन्हें लेकर उस सड़क पर होती .या कोई सराबी पति अपनी पत्नी को उस अँधेरे रात में अपने घर से बाहर निकाल देता …………..और उनके साथ ये हादसा हो जाता.
मैं तो झुक कर सलाम ठोकना चाहूंगी कि कितने पड़े लिखे लोग और ऊपर से “महिला”ऐसे महिला आयोग में बैठे है और अपने महान कर्त्य को अंजाम दे रहे है.
poonampandey_b_280114जानते है इसे हा जी बिल्कुल क्यों नहीं आपकी पूनम पाण्डेय है ………………………क्यों नहीं ऐसे लोगो को कोई रात या अँधेरा इन सब कि कोई फिक्र नहीं होती है…….जाहिर सी बात है ये अपने कई अर्धनग्न चित्रो कि वजह से दुनिया से रुबरु भी हुई है बहुत से लोग इसी वजह से इन्हे जानते है …..इनका यक्तिगत रूप कुछ भी हो पर अपने उत्तेजक पहनावे चाल चलन या बातो से इनका कितनी बार रेप हुआ है जवाब है “कितनी बार भी नहीं” और अगर ऐसा होता तो इनका तो कितनी बार होता………….जैसा कि माननीय आशा महोदया का कहना है कि IMG_20140130_222309IMG_20140130_222225अगर आप सही पहनावे पहने और रात में बहार न निकले न निकले. तो आप ऐसे रेप से बच सकते है…………….
पर मैं समाज के इन जैसे ठेकेदारो से पूछना चाहूंगी कि IMG_20140130_223152 इस नन्हे मासूम का क्या हाथ है कि वो रात में बाहर नहीं निकली .न कपड़ गंदे पहने न बात ही कि ………..बचपना था टॉफी चाहिए थी………………ये भी कसूर है
आज कि खबर है कि ” दिल्ली: 28 वर्षीय शादीशुदा का कार में गैंगरेप कर फेक गए आरोपी

28 year old married allegedly gangraped in car in Delhi खुद के ही दोस्त नौकरी का झांसा देकर कार में ले गए और किया गैंगरेप, देर रात आनंद विहार टर्मिनल के बाहर फेंका”
तो क्या अब समाज ये कहेगा कि महिलाओ को दोस्त मित्र नहीं बनाने चाहिए ………

एक खबर और भी है ” बच्ची से रेप
वेस्ट बंगाल में मिदनापुर के बेलदा में 55साल के आदमी पर 6साल की बच्ची से रेप करने का आरोप लगा है. बढ़ते रेप केसों की ये एक और दरिंदगी भरी घटना है.

हैवानियत
पुलिस ने कहा है कि उन्होंने बिष्टुपद नाम के इस आदमी को गिरफ्तार कर लिया है. वहीं बच्ची को मिदनापुर मेडिकल कॉलेज में भरती कराया गया है. बच्ची के परिवार ने पुलिस को घटना के बारे में बताया. बच्ची के परिवार वालों ने पुलिस को बताया कि ये आदमी बच्ची को उठाकर किसी सुनसान जगह ले गया और वहां उसने बच्ची के साथ रेप किया.”
ये खबर तो पड़ ही ली होगी कि ” पश्चिम बंगाल: गैंग रेप के अभियुक्त न्यायिक हिरासत में

West Bengal gangrape accuses arrested under judicial custody पश्चिम बंगाल के बीरभूम ज़िले में एक ग़ैर आदिवासी लड़के से प्यार करने के कारण एक 20 वर्षीय आदिवासी लड़की के साथ 12 लोगों ने कथित सामूहिक बलात्कार किया है. ”
एक और खबर ” अपनी ही बेटी को बनाया ‘मां’

Daughter delivers her fathers child after getting raped for 8 months दरिंदगी का एक और किस्सा, बाप ने 8 महीनों तक बेटी से दुष्कर्म कर किया गर्भवती ”
यहाँ तो न रात आयी और न ही पहनावा
तो हमें सोचना होगा बदलाव लाना होगा कि हम कैसे जी रहे है………………हमें बदलाव के लिए तैयार होना पड़ेगा कि औरत विलास कि वस्तु नहीं है ………….कुछ कम विचारो वाली महिलाओ के कारन ही महिलाओ कि ऐसी इस्तिथि है ………………रेप सिर्फ निर्भया कि कहानी नहीं है …….जो रात के अँधेरे में सिनेमा देख कर लौट रही थी………………ये कहानी है उस वहशी पन कि जो शर्म गायब होने के बाद कुछ नीच पुरुषो में आ जाता है ..सभी पुरुष उन नीच पुरुषो के कारन हेय दृस्टि से क्यों देखे जाये ……………क्यों किसी नीच बाप के वहशी पन का शिकार होने पर हरेक बेटी अपने बाप से नजर न मिला पाये…………………
क्यों आखिर …………………………..
हमें सोचना होगा कि जोरदार कानून ही केवल इसका प्रतिउत्तर है………………
कुछेक नीच कि नीचता के फलसवरूप क्यों पूरी पुरुष जाती बदनाम हो ………………………..क्यों न कोई ऐसा कानून आये कि मर्यादा बनी रहे……………ऐसा कृत्या करने से पूर्व ही उस नीच कि रूह झकझोर दे .उसकी आत्मा कम्पन्न करने लगे और मस्तिष्क में कानून कि सजा कि लहर दौड़ पड़े……………………………………………तो कब आएगा वो दिन कि सोच से सोचा जायेगा …..विवेक से विचारा जायेगा ………और पुख्ता कानून बनकर खड़ा होगा हरेक ऐसे मासूमो कि रक्षा के लिए ………………………..तब नन्ही कोपलो को सोचना नहीं पड़ेगा कि कहा उडु और कैसे उडु .तब न मानसिकता कराहेगी और ना तब अपरिपक्व दिमाग अपने अवास्तविक बयानो को कह भी पाएंगे,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
तो फिर कहती हु कि
“शीशो में चमकना हमें मंजूर नहीं
कोई भी रंग उजाले का
कोई सपना कही का भी
किसी के रहम पर
कुछ भी हमें मंजूर नहीं
…………..
तो क्या सोच बदलेगी .क्या कानून बनेगा ठोस कानून ….जिसे हम जानते है की जरुरत है…………
“””मैं अपने ब्लॉग के जरिये प्रयास रत रहूंगी की एक एक भी चेत जाये और वो समय आये की लोग सोचे नहीं कानून बन कर सामने हो…………”””
sush

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7 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

February 2, 2014

aaina dikha diya hai aapne galat soch rakhne valon ko .

    sushma के द्वारा
    February 10, 2014

    धन्यवाद शालिनी जी

Rajesh Kumar Srivastav के द्वारा
February 1, 2014

जब तक बलात्कार के लिए केवल और केवल पुरुष या पुरुषवादी मानसिकता को जिम्मेवार माना जाएगा तब -तक इस समस्या का समाधान असम्भव है / महिलाओं को अपनी खामिया भी सुनने चाहिए / सच्चाई कहने वालों को “वहशी औरत” कहना पूरी महिला जाती का अपमान है / अपने विचारों को मर्यादित ढंग से लोगों के सामने रखना वहशीपना कैसे हो सकता है /

    sushma के द्वारा
    February 1, 2014

    श्री राजेश जी ,जहा तक सभी शिक्षाओ का निचोड़ है वो यही है कि बुराई का कोई धर्म नहीं होता ,बुराई मानवता रहित होती है ,बुराई न तो औरत है न ही आदमी ………इसीलिए मैंने कहा कि “कुछ” ,उनको पुरुष भी कहलाने का अधिकार नहीं है …….पुरुष और नारी इस दुनिया में समाज में एक दूसरे के पूरक और निर्भर रूप से प्रभु के द्वारा रचित दो सुन्दर संरचना है जिससे प्रकृति गतिमान होती है…….इसलिए उन लोगो को कदापि पुरुष नहीं कहा जा सकता जो नारी अस्मिता को क्षति पहुंचाते है………इसीलिए आप का यहाँ ये कहना कि “केवल पुरुष या पुरुषवादी मानसिकता को जिम्मेवार माना जाएगा” बिलकुल गलत है …………क्युकी ऐसे लोगो को पुरुष तो कहा ही नहीं जा सकता. दूसरी बात आपने कही “सच्चाई कहने वालों को” तो श्री राजेश जी आपसे बड़े दुखी मन से कहना चाहूंगी कि जिस निर्भया कि बात में मैडम साहिबा ने ऐसे बयां दिए है उसकी जिंदगी जितने क्रूर ढंग से ली गयी है ,,,भगवन ऐसी मौत तो दुश्मनो को भी नसीब न करे………………शायद आपके अंतर्मन ने वो चीखे न सुनी हो ,वो चीत्कार न सुनी हो जो उस बेचारी ने मरते हुए हर एक पल दी हो………शायद आपको अंदाजा न हो कि एक गरीब या मिडिल क्लास के बच्चे जब अपनी व्यसायिक शिक्षा पूरी करते है तो एक माँ और ऐक पिता के खून कि एक एक बूंद उसमे लग जाती है .और जब समूचा पड़ा लिखा एक शरीर अपने प्राण छोड़ता है तो वो माँ पिता जीते जी मर जाते है……………निर्भया ने जितना सहा उसके लिए हैम जितना भी लिखे वो कम ही होगा उसने अपनी देह में जितने घाव खाये होंगे उससे ज्यादा अपनी आत्मा में खाये……उसकी आत्मा कितनी कराह रही होगी जब उसे ये दिखेगा कि एक औरत ही उसे इस प्रकार ” सच्चाई ” के तराजू में तोल रही है……….बहुत बड़े शब्द लिखने से पहले एक बार बस उस दर्द का सामना कर उसे अपनी आत्मा से महसूस कीजिये………………………………………………………………………………सबकी जिंदगी एक ही तरह खुशगवार नहीं होती कोई सारी जिंदगी मखमली चादरों में बिना कुछ किये सोता है और कही कही जिंदगी दर्द से कराह कर सिसकियाँ भी लेना भूल जाती है,कभी निकलिए उस दर्द कि ओर जो उन चेहरो पर बिखरा है जहाँ कोई सुनवाई नहीं होती,कोई कानून नहीं होता ,कोई जिंदगी नहीं होती……………… ……………………………………

Abid ali mansoori के द्वारा
January 31, 2014

Main aapke vicharon se sehmat hun adarniya shushma ji!

    sushma के द्वारा
    February 1, 2014

    धन्यवाद आबिद जी


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