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यौन उत्पीड़न – Jagran Junction Forum

Posted On: 11 Jan, 2012 में

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बलात्कार या छेड़खानीकर्नाटक के महिला और बाल कल्याण मंत्री सी.सी. पाटिल ने महिलाओं के पहनावे को लेकर जो अपनी राय व्यक्त की है तथा आंध्र प्रदेश के डीजीपी दिनेश रेड्डी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि महिलाओं के फैशनेबल और पारदर्शी कपड़े पहनने से रेप की घटनाएं बढ़ती हैं।”मैं निहायत ही निजी तौर पे उन्हें बहुत बड़ी बधाई देना चाहूंगी की उन्होंने अपनी पद की गरिमा का अत्यंत मान रखते हुए ,इस भारत वर्ष में एक माँ के कोख से जनम लेकर एक पत्नी रूप में महिला को पाकर और पुत्री रूप में अपने सपने को पाकर बहुत ही उच्च विचारधारा का परिचय दिया है,उन्हें तो रत्नों से सुशोभित करना चाहिए.
जो महिला का अर्थ न जान सके उसे महिला और बाल कल्याण मंत्री बना देना बड़े गजब की बात है
मॉरल पुलिसिंग जैसी बात करके अपने चरित्र को छुपाना और अपने को सही साबित करना यू तो बड़ी आम बात है और यही वजह है की आज भी हमारे समाज में पुरुषो की सोच वही पुरातन पंथी मानसिकता लेकर बड़ी करायी जाती है.अगर बात इतनी है की खुले, बदन दिखाऊ और पश्चिमी सभ्यता के परिधान धारण करने से बलात्कार की प्रेरणा मिलती है। महिलाओ के सेक्सी ड्रेस पहनने से पुरुषों में काम भावना जाग्रत हो जाती है जिसमें से कुछ अपनी भावनाओं पर नियंत्रण नहीं रख पाते
तो सीधा सपाट सवाल ये है कि १-बलात्कार कि शिकार अधिकतर सीधी लड़कियां ही क्यों होती है जिन्हें आसानी से फसाया जा सकता है?
२-बलात्कार अधिकतर रात के अँधेरे में ही क्यों और कैसे हो जाते है ,जबकि रात को किसी को देखना ही संभव न हो तब भी गिध्हा कि निगाह रखने वाले रात के अंधेरो का फायदा किस तरह से उठा लेते है.
३-सर्दियों में जब लड़कियां पूरे क्या पूरे बंद कपडे पहन के निकलती है तो क्या? बलात्कार या छेड़खानी जैसी कहानी नहीं होती है ?
४-क्या जहा ग्रामीण इलाके है और जहा पर ज्यादातर लड़कियां अपने गाव के ही तौर तरीके से ही रहते है वहा बलात्कार या छेड़खानी वाली घटना नहीं होनी चाहिए.क्योकि वहा तो सभी बंद कपडे और पूरे ढके कपडे पहनते है तो मोरल पुलिसिंग वाली बात कहा रह जाती है.
५-यहाँ तक भी ठीक था आप उसे क्या कहेंगे ? जब पति अपनी पत्नी के संबंधो को एक किंग शिप कि तरह फोलो करता है और उससे जोर जबदस्ती कि कोशिश करता है. [यहाँ याद दिलाना चाहूंगी कि इसके लिए एक व्यवस्तित कानून है 'पति द्वारा jor जबरदस्ती भी बलात्कार की श्रेणी में आ सकता है. ]
या यहाँ नया मॉरल पुलिसिंग आ जाता है. और लोग नेतिकता कि चद्दर चड़ा लेते है.
छेड़छाड़, यौन दुर्व्यवहार या बलात्कार की घटनाएं सिर्फ और सिर्फ मनुष्य की नीच मानसिकता और उसके शिक्षा के अधूरेपन को प्रदर्शित करती है . जो मनुष्य अपनी माँ अपनी बहन अपनी पत्नी अपनी दीदी और अपने घर के महिला सदस्यों का सम्मान नहीं कर सकता है या बाहर भी अपने साथ काम करने वाले महिलाओ या न साथ कम करने वाली महिलाओ का सम्मान नहीं कर सकता है वह उस जानवर के समान है जो पैदा होने के बाद अपनी पहचान अपनी मनुष्यता भूल जाता है. जिसके जीवन में मनुष्यता की रिक्ति रह जाती है. और जो अपने ओछेपन को छुपाने के लिए मोरल पुलिसिंग और न जाने क्या क्या और किस किस विचार धारा का सहारा लेता है.
मैं पूछना चाहती हु ऐसे लोगो से की ये अपनी माँ बहन को किस नजर से देखते है . और उन लोगो को किस नजर से देखते है जो इनकी माँ बहन को “इनकी “वाली”नजर ” से देखते है.
महिलाओं की आजादी के बड़े बड़े चाहने वाले देखे पर ऐसे न देखे जो ये बताएं की महिलाएं क्या करे और क्या न करे.
दि महिलाएं कथित शालीन वस्त्र पहनेंगी तो यौन दुर्व्यवहार रुक जाएगा,
क्या आप सब मर्द ये लिखित दे सकते है की जब ऐसा होगा तब नि: संदेह यौन दुर्व्यवहार रुक जायेगा.मेरा व्यक्तिगत प्रश्न है की क्या आप दे सकते है . हा ; आप संदेह की इस्तिथि में है . और यही आपका सच भी है और जवाब भी.
क्योकि कोई भी मानवता के विरुद्ध कोई भी कार्य की स्वीकृति नि:संदेह लिखित नहीं हो सकती ठीक वैसे ही जैसे कि बुरे इन्सान का कोई धर्म नहीं होता . मारने वाला कभी भी ये नहीं सोचता कि ये एक गलत कार्य है .आतंकवाद उग्रवाद बुराई नफरत कि कोई परिभाषा नहीं है.आप कह नहीं सकते कि फ़ला मनुष्य ख़राब है या फ़ला जाती या धर्म ख़राब है. क्यों?
क्योकि गलत का कोई धर्म नहीं होता गलत न मानवता है न ही मनुष्यता.
गलत सिर्फ और सिर्फ गलत है.
अब बात करे उन कुछ लोगो कि जो अपने स्वार्थ सिध्धि के लिए कुछ खोखले तर्क देने का प्रयास करते है ताकि इसके पीछे वह अपने नापाक व् कुत्सित विचारो को पनपने दे सके और उन चंद लोगो कि वाहवाही लूट सके जो इनके इन कामो में सहयोगी बन सकते है.
कहा जाता है अगर हमें दुनिया बदलनी है तो सबसे पहले हमें स्वयं को बदलना पड़ेगा ,
ऐसा क्यों कहा जाता है आप जानते है?
क्योकि आप स्वयं साकार हो सके उस विचारो के साथ जिन्हें आप दुसरो के साथ देखना चाहते है. ऐसा इसलिए भी जरुरी है क्योकि आपको स्वयं आत्मसात करते हुए उन विचारो कि गहराइयों का पता तो चलेगा ही इसके साथ साथ आप उन विचारो के साथ संपूर्ण न्याय भी कर पाएंगे . जब आप उन विचारो को किसी दूसरे को अपनाने को कहेंगे तब आपको कुछ ज्यादा दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ेगा.आप सरलतम तरीके से दूसरे को अपनी बात समझा पाएंगे.
तो जब आप अपने आप से शुरुवात करना नहीं चाहते तो आप को क्या हक बनता है कि आप महिलाओ के कपड़ो में झाकने जाये और उनके ठेकेदार बने.
सेक्सी या अंग दिखाऊ वस्त्र पहनने को लेकर मैं एक ठोस सवाल रखना चाहूंगी कि क्या मुस्लिम देशो में जहा सजना और सवरना नापाक माना जाता है और बुरका उनके वस्त्रो का एक निहायत ही आवश्यक अंग है. क्या वहां ओरते बिलकुल १०० % सुरक्षित है क्योकि आपके ही कथनानुसार जितनी स्किन ढकेगी उतनी ही सुरक्षा कि गारंटी मिलेगी.
मुझे अब भी आपके जवाब का इंतजार है.?
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बड़ा अफ़सोस है कि कई तरह के जवाब मन में आये होंगे . तो इतने जवाब क्यों आये ?
मेरा कहना है कि क्यों नहीं एक बार भी आपने कहा कि पूरी स्किन ढकना १००% गारंटी है .
बस यही है सारा घालमेल :
दरअसल महिलाये कई बार अपने आप को अपने घर में भी असुरक्षित महसूस करती है.कुंठित मानसिकता महिलाओ के लिए सारे दरवाजे बंद करने का प्रयास करती है. दहेज़ हो या मानसिक उत्पीडन ,घर में यौन दुर्व्यवहार कि ही बात न करे तो कई संकट महिलाओ के लिए मुह बाएं खड़े मिलते है. सिर्फ कपडे पुरे पहन लेने से महिलाएं अपने आप को अँधेरी रात में या कही अकेले में या कही दिन के उजाले में भी सुरक्षित नहीं कर सकती ..
असल बात यही है कि जब तक हम ,और आप ,आप जैसे ये साबित करते रहेंगे की गलती महिलाओ के पुरे कपडे न पहनने की है तब तक कुछ ऐसे जो आपसे ज्यादा शातिर है. आपकी बातो का नाजायज फायदा लेते रहेंगे. और आप न चाहते हुए भी उनकी पेरवी में खड़े होते रहेंगे.
क्यों नहीं कुछ आप जैसो के मन में महिलाओ के प्रति बुरी भावना नहीं आती है. क्योकि आप समझते है कि महिलाओ के कपडे न पहनने पर भी आप के संस्कार इस बात को गवारा नहीं करते कि आप बुरी बात करे .फिर सभी ऐसा क्यों नहीं सोच सकते ?
समझाने कि सिर्फ इतनी बात है कि ये कुंठा मानसिक इस्तिथि को इंगित करती है जहा आप मानसिक रूप से बीमार है.कुछ आपमें है जो बुरी उर्जा के रूप में बाहर आना चाहता है.क्योकि बुराई हरेक रूप में बस बुरी होती है.
अस्तु

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6 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sushma के द्वारा
July 13, 2012

thanx sumit ji

surendr shukl bhramar5 के द्वारा
January 12, 2012

क्या आप सब मर्द ये लिखित दे सकते है की जब ऐसा होगा तब नि: संदेह यौन दुर्व्यवहार रुक जायेगा/// प्रिय सुषमा जी ..सुन्दर प्रश्न आप के ..सार्थक लेख ..लिखा पढ़ा तो सारा क़ानून हमारा धरा है आज कहाँ काम करता है ..जहां देखों उसमे छेद है …और उस कानून का दुरूपयोग है …सो लिख कर देने से क्या हो जाएगा लेकिन हाँ निर्वस्त्र घूमने से, बार में मजमा लगाने से, छोटे कपडे पहनने से, काम को भड़काने का काम तो होता ही है ..जहां आप को नहीं लगता की कुछ होता है उसका प्रतिफल प्रतिरूप दूसरी जगह जन्म ले लेता है ..चाहे वह रात में हो …चाहे जाड़े में हो ..जहां मौका मिला अग्नि भड़क जाती है जो मानसिक रूप से विकृत हो चुके हैं उनकी ..वे मानसिक रोगी कहो पागल कहो या लम्पट ..मौके का फायदा उठा लेते हैं केवल गंवार लडकियां नहीं बहुत पढ़ी लिखी नौकरी की तलाश में ..नायिका बनने की चाहत में …भी फंस जाती हैं जाल में …कुछ शौकिया भी खुद रूचि लेकर ..बाद में यौवन उत्पीडन बन सामने आता है .. सो बहुत से कारण हैं इस घिनौने काम के …अपवाद हर जगह है ..हमें इस का पुरजोर विरोध करना चाहिए ..औं चाहे जिन कारणों से ये बढे उसे रोकना चाहिए .. जय श्री राधे भ्रमर ५

    sushma के द्वारा
    January 26, 2012

    सुरेन्द्र जी धन्यवाद देना चाहूंगी की आपने लेख पड़ा .लेकिन “छोटे कपडे पहनने से ……………….” तो इतना ही कहना चाहूंगी की अपने शायद औरत और आदमी को एक नजर से देखा ही नहीं. अगर एक औरत सभी संबंधो को निभाते हुए शालीनता का आत्म सयम का परिचय दे सकती है तो फिर पुरुष के लिए ” ये सारे बहाने क्यों? एक औरत अगर विधवा है अगर शादीसुदा है कुवारी है तलाक्सुदा है उसे कई नियमो के टाक पर रखा जाता है…….फिर क्यों ये जानवरों सरीखा व्यवहार को आप पुरुषो के पक्ष में ही रख कर देखते है?

Sumit के द्वारा
January 11, 2012

बहुत अच्छा…….ऐसे ही समाज को जगाती रहे http://sumitnaithani23.jagranjunction.com/2012/01/05/वो-पव्वा-चढ़ा-के-आई/

nishamittal के द्वारा
January 11, 2012

बहुत ही स्पष्ट शब्दों में चर्चित विषय पर बहुत दिन पश्चात आपका आलेख बहुत अच्छा लगा सुषमा जी बधाई.मंच पर उपस्थिति बनाये रखें कृपया.इतने दिन पश्चार आप भूल भी गयी होंगी सबको?

    sushma के द्वारा
    January 26, 2012

    नहीं निशा जी कुछ लोगो को भूलना जरुरी नहीं होता. क्योकि वे जिंदगी के लिए जरुरी होते है. धन्यवाद आपका.


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