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नया साल

Posted On: 1 Jan, 2012 में

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flower नयी नयी उमंग लेकर आया है
नया साल नयी नयी तरंग लेकर आया है .
इस नए साल में हम सभी को एक नयी प्रेरणा ,एक नयी सच्चाई से आगे आना होगा. आज यूथ बहुत सक्रिय है .पर इसमें से ही कुछ लोग ऐसे भी है जो सभी कुछ कचरा करने में लगे है है उन्हें अपने स्वार्थ के अलावा कुछ भी नजर नहीं आता है.ओर कई बार वे यूथ में शामिल होने का नाटक करते है ओर उन्हें बेवकूफ भी बनाने की कोशिश करते है ,जो वाकई इस देश को सही तरीके से बदलना चाहते है.मैं उस यूथ से कहना चाहूंगी की वे सही समय ओर सही लोगो को चुनकर आगे बड़े .नहीं तो नापाक इरादों के आगे हम सभी हमेशा बेबस ही खड़े रह जायेंगे .मैंने कई बार देखा है कही कही सही चीजों के लिए गेर्जिम्मेदार लोग आगे आकर खड़े हो जाते है ओर बाद में इसका वे फायदा उठाते है.भ्रसटाचार को मिटाने की कोशिश हो या बोक्सिंग हो ,योग की शिक्षा हो या फिर स्कूल में नयी योजनाये सम्मिलित होने का कार्य हो,चुनावी प्रचार हो या किसी मंत्री के अच्छे काम की सराहना हो”मैंने देखा है,कई बार गलत लोग उसमे घुसकर उन चीजों के मायने ही बदल देते है.flower
पिछाले दिनों भ्रसटाचार के खिलाफ रेली निकाली गई उसमे कुछ ऐसे भी तत्त्व शामिल थे जिन्हें इन बातो से दूर दूर तक कोई मतलब ना था ,पर वो शामिल थे ?क्यों कर? क्योकि असली फायदा तो वही उठाने वाले है.हम जानते है किसी को चीनी ना खाने की शिक्षा तब नहीं दी जानी चाहिए जब तक आप स्वयं उस चीनी खाने की आदत से मुक्त ना हो.ओर यही असल चीज़ है की जब तक आप स्वयं तेयार ना हो ,आप उस कार्य के मूल्य को ना समझ रहे हो ,उस कार्य का किया जाना निरर्थक है.दरअसल परिवर्तन संसार का नियम है पर वो नियम व्यक्ति की स्वछंदता में हस्तछेप करता हुआ नहीं होना चाहिए.आप कहे की अनशन किया जाना जरुरी है पर किसी को जानबूझकर अनशन में झोक देना कहा तक उचित है .आज यूथ सजग है ,जिम्मेदार है.वो साहसिक कार्यो के लिए आगे आना चाहता है. पर हमारे बुजुर्गो की इसमें नेतिक रूप से बड़ी जिम्मेदारी बनती है कि वो इन युवा वर्ग को एक सही रास्ते में ले जा सके.उन्हें बहकाने से किसी का भी कुछ भला नहीं होने वाला. क्या ही अच्छा हो कि आपके साथ खड़ा होने वाला यूथ स्वयं भी एक जिम्मेदार नागरिक हो .वो समझ सके कि अपनी आत्मा को अपने धरती माँ के साथ जोड़कर सारे फेसले लेने का सही वक्त आ गया है. बड़ी ख़ुशी होती है जब भारत के लोगो को यहाँ वहा कई प्रतिभावो को आगे आते देखते है तो क्यों ना नए साल में अपनी सोच का दायरा बडाये .हमें गर्व होना चाहिए कि हम भारत में पैदा हुए है ओर इसकी सुन्दरता को हमें अपनी विनम्रता से ओर भी बढाना चाहिए.” जय हिंद ”

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6 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

kripansh dixit के द्वारा
December 27, 2014

aap ko bhut bhut hardik subhkamanaye naye varsh par or apke vicharo se mere andar wale imanadar vyakti ko jaga diya apko meri taraf se thanku !!!!!!!!!

jlsingh के द्वारा
January 2, 2012

सुषमा जी, सदर अभिवादन और नव वर्ष की शुभकामना! आपने बहुत ही सुन्दर विषय पर विवेचना की है और राज जी ने अपनी प्रतिक्रिया में इसे और प्रखर बना दिया है. वर्तमान परिस्थिति के लिए कुछ हद तक हम भी जिम्मेदार हैं. और वे लोग तो हमारा दोहन कर ही रहे हैं. हमें सजग होने की आवश्यकता है. आभार!

RaJ के द्वारा
January 1, 2012

मुझे इस परिवर्तन के जिक्र में कहीं न कहीं जिसे वृद्ध कहकर कहा गया है वह अन्ना की और इन्गति कर रहा है | यह बिलकुल सही है कि परिवर्तन कि राह युवा कि कर्मठता से ही बनेगी पर युवा अधिकतर पैसे कि चकाचोंध से ग्रसित है और अच्छे से अच्छा भारतीय दिमाग विदेशों में अपने बढने के सपने पुरे कर रहा है और विदेशी भी कोई खैरात नहीं दे रहे वे इन दिमागों से बेहतरीन अनुसन्धान करके पुनः उने दुने कम रहे है | युवा मन से राजनितिक प्रतिबधता लगभग खत्म हो गयी है | यदि सही सुन्दर संसार कि कल्पना करनी है तो केवल उत्क्रष्ठ्ता कि पूजा ही नहीं करनी पड़ेगी वरन सामाजिक समानता को लाना होगा | मॉल और मल्टीप्लेक्स , डांसिंग डेटिंग में ब्यस्त युवा कहीं देश के सम्मान कि तलाश से दूर अपने सुख तलाश रहा है | अन्ना ने एक इतनी बढ़ी बहस कर[पशन के विरोध में ला दी जिसकी जरुरत भारतीय गणतंत्र में स्वाधीनता के बाद से ही थी पर गैर पढ़ा लिखा रोटी रोज़ी अज्ञानता में रहा और एक बड़ा मध्य वर्ग करप्शन के सत्त्य्हं जीना सीख गया | उदार वाद आया फिर आया बेहतर सड़कों स्टार होटल, बार, पाश्चात्य चमक दमक जिसे आधुनिक सांस्कृतिक होना बताया जाने लगा | किसी राजनितिक विरोध से युवा विमुख < देश में भूख होती आत्महत्या से कोई मतलब नहीं आतंकवाद से भी समझोता , हमको आओ मर जाओ हम डरते नहीं दुसरे दिन से मुंबई काम पर जाती रही है | abhi केवल संभल के चलने और तमाशा देखने काम नहीं शायद बहकाना भी पढ़े जिससे सड़क पर बहस झिदे कि यह नपुंसक राजनीती जिसने अहमें गर्तमें पंहुचा दिया सबसे भ्रष्टतम होने का तमगा भी दिलवा दिया में शायद गौरवान्वित महसूस न कर पाऊं हाँ आशावाद के नाम पर दिल बहलाने को कुछ भी कहलवा लें लेख कि दिशा सही है और इअरादा नेक है बधाई शुष्मा जी

    sushma के द्वारा
    January 1, 2012

    धन्यवाद राज जी नव वर्ष की मुबारका

Santosh Kumar के द्वारा
January 1, 2012

बहुत सुन्दर विचार सुषमा जी ,..नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाये

    sushma के द्वारा
    January 1, 2012

    आपको भी संतोष जी नव वर्ष की बहुत बहुत सुभकामनाये


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