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कोई बात न पचे ओरतन के पेट मा

Posted On: 29 Sep, 2011 में

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तो आज ओरतो के विषय में कुछ बात कर लिया जाये. हाँ हाँ भैया हमेसा ओरते गलत नहीं होती. बेचारी सीधी साधी ओरतो के पीछे पड़े रहोगे हाथ धो के ……मैं सोचती हु कि ऐसा करके ……..क्या….? मतलब ki . कोई बात ओरतो के पेट में न पचे ऐसा करके भगवन ने बड़ा उपकार किया है. अगर देखा जाये तो.
हाँ बुराई थोड़ी न हो जाती है सारी चीज़..भैये सारा तेज़ बुलेटिन ओरतो क़ी वजह से ही चलता है. मानो ना मानो. शर्मा जी के आते ही ऑफिस से सरे मोहल्ले क़ी खबर कौन देता है………शर्माइन और कौन ……अरे कम से कम इससे पता तो चलता है कि पड़ोस का बिट्टू ठीक नहीं है .बिटिया जवान हो रही है.और सबसे पहले बिट्टू से बात करने पर प्रतिबन्ध लगाना है…………..ना रहेगा सांप ना रहेगी सिड़ी. अरे भाई सिड़ी से ही तो ऊपर वाले जीने में पहुंचा जा सकता है .वही तो बिटिया का कमरा है .. सो ये बात ना पचके ही भली है.
मैं तो कहू टूजी इसपर ही तो बेस है. लो भई हिना को वापस बुलवा लिया. अरे कितनी भली लग रही थी बिलकुल हेरोइन कि तरह .मुए को ये भी रस ना आया . सोचा होगा यहाँ रहकर कही बात ना पचे तो …………………………………खतरा हो सकता है………
अब क्लास कि बात ही ले ले किसके पास कितने अच्छे नोट्स है ” सभी तरह के ” ये तो लड़कियां ही बताती है.तो गलत क्या है.कुछ लोग नोट्स से ही तो पास होते है.अब इसमें भी गलत कि बूऊऊऊऊ आ रही है ……नहीं नहीं नाक बंद कर लो ……..और चाहे तो आँख भी बंद कर लो……….
अब बात को आगे बढाएं तो पहुचे पचर से आंग्ल भाषा के पचर तक जी हा किटी पार्टी तक …….कोई नयी बात नहीं है जो नहीं भी जानता वो भी जानता है …कैसे ? जी हाँ सही दिमाग लगाया पचे न बात ओरतन के “”"”"”आपने देखी है किटी नहीं न……तो अगर बात पच जाती तो आप कैसे जानते……….तो भैया सारा श्रेय ओरतो को ही जाता है.कितना कुछ तो करती है बेचारी सारा संसार ही मानो चला रही है पर आप तो वही दोष देंगे…..आज तक अगर सारी बात ओपन हुई है तो इसी बात की बात पर कि,” किसी दुसरे को ना बताना “. और हर दूसरा हर अन्य दुसरे को जरुर बताता है.
तो भाई बात तो न ही पचे तो अच्छा है………ॐ

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9 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

atharvavedamanoj के द्वारा
October 3, 2011

आदरणीय सुषमा जी, नमस्कार, आपका इस पोस्ट का उत्तरवर्ती भी पढ़ा, वैचारिक रूप से उन महानुभाव से असहमत होने के कारण उस पोस्ट से कुट्टी कर इसी से मिल्ली कर लेता हूँ और यह क्या लिख दिया है आपने? लाहौल विला कुव्वत, सारे ख्वातीन को एकै कैटेगरी में? हमारे एक परिचित XYZ महोदय से मैं हमेशा प्रताडित रहता हूँ, जब ऊ गल्चौरा करने लगते हैं तो खुदा खैर करे एक एक की पूरी जन्मकुंडली बयाँ कर देते हैं|एक बार उनकी साईकिल को चोर उठा कर ले गएँ, मुझे लगा की पूरा संसद ही गूँज उठेगा, एक महीना तक साईकिल, साईकिल, साईकिल|अबकी हांथी पर बैठ गए हैं…और मेरे कान में दम हो गया है|बहुत ही सुन्दर व्यंग्य रचना…साधुवाद|जय भारत, जय भारती|

    sushma के द्वारा
    August 28, 2012

    धन्यवाद मनोज जी

abodhbaalak के द्वारा
October 1, 2011

बड़ा ही मज़ेदार सुषमा जी, काफी समय के बाद आपको पढ़ा पर मज़ा आ गया… :) http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    sushma के द्वारा
    October 1, 2011

    धन्यवाद अबोध जी.

Santosh Kumar के द्वारा
September 30, 2011

सुषमा जी ,.सादर नमस्कार बड़े सहज और रोचक अंदाल में आपने हाजमे का पोस्टमार्टम किया है ,..बहुत बधाई http://santo1979.jagranjunction.com/

    sushma के द्वारा
    October 1, 2011

    धन्यवाद संतोष कुमार जी.

jlsingh के द्वारा
September 30, 2011

आज तक अगर सारी बात ओपन हुई है तो इसी बात की बात पर कि,” किसी दुसरे को ना बताना “. और हर दूसरा हर अन्य दुसरे को जरुर बताता है. वह सुषमा जी, बड़े रोचक ढंग से बात पचाई है? अच्छा लगा पढ़कर!

chaatak के द्वारा
September 29, 2011

सुषमा जी, बातों बातों में बहुत सारी बातें तो आप यूँ ही कह गईं| जो भी हो सांप सीढ़ी का खेल है सदाबहार, हर उम्र के लोगों ने किशोर से लेकर युवावस्था के बीच इसे खेला जरूर होगा| कईयों के तो अभी निशान भी बने होंगे और जिनकी सीढ़ी मजबूत नहीं रही होगी उनके निशानों के बारे में तो सोसाइटी की सारी महिलाओं को पता होगा उनके पेट में बात जो नहीं पचती भाई! अच्छी पोस्ट पर हार्दिक बधाई!

    sushma के द्वारा
    October 1, 2011

    धन्यवाद


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